Mindset Book Summary in Hindi: 3 मानसिकता बदलाव जो सब कुछ बदल देंगे

Mindset Book Summary in Hindi
Mindset Book Summary in Hindi

Table of Contents

Introduction- Mindset Book Summary in Hindi

हेलो दोस्तों, स्वागत है आपका Mindset Book Summary in Hindi में।

दोस्तों, क्या आपने कभी सोचा है की हमारी सोच हमारी ज़िन्दगी का रास्ता कैसे तय करती है? आज के competitive world में, success सिर्फ talent या natural ability पे depend नहीं करता, बल्कि हमारे Mindset पे भी बहुत कुछ निर्भर करता है। Carol S. Dweck की bestseller book “Mindset: The New Psychology of Success” ये बताती है की आपका mindset – यानी की आपके सोचने का तरीका – आपके success, learning और overall development को कितना एफेक्ट करता है।

और इसी सोचने के तरीक़े के बारे में बात ऑथर कैरोल ड्वेक जो एक प्रसिद्ध मनोवैज्ञानिक भी हैं, अपनी बुक माइंडसेट में करते हैं। वह इस बुक में कहते हैं की अपनी इंटेलिजेंस, क्षमताओं और अपनी पर्सनालिटी के बारे में हम जो सोचते हैं वो कोई फिक्स्ड ऐट्रिब्यूट्स नहीं हैं, बल्कि ऐसी चीज़ें हैं जो हम अपने माइंडसेट से बनाते हैं। उन्होंने हमें 2 अलग अलग तरह की मानसिकताओं के बारे में बताया है- फिक्स्ड और ग्रोथ

फिक्स्ड माइंसेट वाले लोग अपने गुणों को पूरनिर्धारित और अपरिवर्तनीय के रूप में देखते हैं। ऐसे लोग मानते हैं कि बुद्धिमत्ता, प्रतिभा और व्यक्तित्व जन्मजात प्रतिभाएं होती हैं। इस बिलीफ सिस्टम वाले लोग असफ़लता के डर से हमेशा चुनौतियों से बचते रहते हैं जिसकी वजह से उनके जीवन में stagnation (ठहराव) आ जाता है।

वहीँ दूसरी ओर, विकास मानसिकता (Growth Mindset) वाले लोग मानते हैं कि बुद्धिमत्ता और प्रतिभा को निखारा जा सकता है तथा लगातार प्रयास, दृढ़ता और सीख कर वह अपनी क्षमताओं को बेहतर बना सकते हैं। ऐसे लोग चुनातियों को स्वीकार करते हैं और असफलता को विकास के अवसर के रूप में देखते हैं और सुधार के लिए लगातार प्रयास करते रहते हैं।

माइंडसेट न केवल इन मूलभूत अवधारणाओं पर प्रकाश डालता है बल्कि वैज्ञानिक अनुसंधान और वास्तविक जीवन के उदाहरणों से सम्मोहक साक्ष्य भी प्रदान करता है। हम देखते हैं कि कैसे छात्रों से लेकर एथलीटों और व्यापारिक नेताओं तक, व्यक्तियों ने विकास की मानसिकता को अपनाकर अपना जीवन बदल दिया है।

दोस्तों, इस बुक में ऑथर ने न सिर्फ इन फॉउण्डेशनल कॉन्सेप्ट्स पर बात की है, बल्कि साइंटिफिक रिसर्च और रियल लाइफ एग्जामपल्स के ज़रिये अपने माइंडसेट को सुधारने के तरीके भी बताये हैं जिनके बारे में हम आने वाले सेक्शनस में जानेंगे।

तो आइये दोस्तों, शुरू करते हैं Mindset Book Summary in Hindi

The Mindsets

Fixed Vs Growth Mindset- Mindset Book Summary in Hindi
Fixed Vs Growth Mindset- Mindset Book Summary in Hindi

एक बार ऑथर ड्वेक, जो एक रिसर्चअर भी हैं, कुछ बच्चों को पजल सॉल्व करते हुए देखती हैं। कुछ बच्चे पजल की चुनौती को पसंद करते हैं और ख़ुशी से उसे सॉल्व करने लगते हैं वहीँ कुछ बच्चे हतोत्साहित हो जाते हैं। इससे उन्हें आश्चर्य होता है और वे सोचने लगती हैं कि बच्चे गलतियों पर अलग-अलग प्रतिक्रिया क्यों करते हैं?

फिर वे ये निष्कर्ष निकालती हैं की ऐसा उनकी मानसिकता के कारण होता है, यानी बुद्धिमत्ता और क्षमता को लेकर उनके विश्वास के कारण।

फिक्स्ड माइंडसेट

ऑथर कहती हैं कि फिक्स्ड माइंसेट वाले लोग सोचते हैं की बुद्धिमत्ता एक ऐसा गुण है जो पूर्व निर्धारित और अपरिवर्तनीय हैं। ऐसे लोग जब सफल होते हैं तो वे इसका श्रेय अपनी इंटेलिजेंस को देते हैं और वे असफ़लता को बुद्धि या कौशल की कमी के रूप में देखते हैं।

निश्चित मानसिकता वाले लोग मानते हैं कि, उपलब्धियाँ और असफलताएँ सीधे तौर पर किसी की अंतर्निहित क्षमताओं से जुड़ी होती हैं। ऑथर कहती हैं की वह स्वयं एक फिक्स्ड माइंडसेट वाली व्यक्ति थी लेकिन उन्होंने ख़ुद पर मेहनत की और अपना माइंडसेट चेंज किया।

ग्रोथ माइंडसेट

वहीँ दूसरी ओर ग्रोथ माइंडसेट वाले लोग मानते हैं कि बुद्धि (intelligence) को प्रयास और सीखकर बढ़ाया जा सकता है। ये लोग चुनातियों को अवसर और गलतियों को सीढ़ियों के रूप में देखते हैं। ग्रोथ माइंडसेट वाले लोग केवल प्रयास के लिए “अच्छा काम” नहीं करते बल्कि वे वास्तव में ये विश्वास करते हैं कि वे बेहतर हो सकते हैं।

दोस्तों, ये मानसिकताएँ वास्तव में मायने रखती हैं। निश्चित मानसिकता आपको चुनौतियों से डराती है और असफलता से बचाती है। विकास की मानसिकता आपको सीखने में रुचि रखती है, असफलताओं से उबरने में मदद करती है और विश्वास दिलाती है कि आप सुधार कर सकते हैं।

आने वाले सेक्शंस में हम देखंगे कि ये मानसिकताएँ हर चीज़ जैसे स्कूल, रिश्ते, यहाँ तक कि आप कौन बनते हैं, को कैसे प्रभावित करती हैं।

Inside The Mindsets

दोस्तों, कल्पना करें कि आपके मस्तिष्क में दो स्विच हैं: फिक्स्ड और ग्रोथ। आइये एक एक करके इनके बारे में जानते हैं।

फिक्स्ड

  • बुद्धि जैसे गुणों को एक बंद बक्से की तरह, पत्थर में जड़े हुए के रूप में सोचें।
  • सफलता बक्से का ताला खोलती है, यह साबित करती है कि आप स्मार्ट हैं। असफलता इसे बंद कर देती है, जिससे आप मूर्ख महसूस करते हैं।
  • चुनौतियाँ आपको डराती हैं क्योंकि वे बता सकती हैं कि डिब्बे के अंदर क्या है।
  • अगर आप पहले से ही चतुर (smart) या मूर्ख (stupid) हैं तो प्रयास व्यर्थ लगता है।

ग्रोथ

  • एक्सरसाइज से मजबूत होने वाली मांसपेशियों के बारे में सोचें।
  • चुनौतियाँ जिम हैं, जो आपको मस्तिष्क की मांसपेशियाँ बनाने में मदद करती हैं।
  • गलतियाँ सिर्फ गिराया हुआ वजन हैं, जो आपको बेहतर तरीके से उठाना सिखाती हैं।
  • प्रयास से ही विकास संभव है, भले ही आप कभी-कभी लड़खड़ा जाएं।

ये स्विच हर चीज़ को प्रभावित करते हैं

  • स्कूल: फिक्स्ड माइंडसेट सिर्फ ग्रेड के बारे में चिंता करता हैं, ग्रोथ माइंडसेट सीखना पसंद करता हैं।
  • रिश्ते: फिक्स्ड माइंडसेट फीडबैक नकारात्मक तरह से देखता है, ग्रोथ माइंडसेट इसे स्वीकार करता हैं।
  • काम: फिक्स्ड माइंडसेट जो जानते हैं उस पर कायम रहते हैं, ग्रोथ माइंडसेट चुनौतियों को स्वीकार करता हैं।

स्विच बदलने में मेहनत लगती है

  • अपने दिमाग की आवाज़ सुनें: क्या यह आपको बता रहा है कि आप फंस गए हैं या आप सीख सकते हैं?
  • स्थिर विचारों को चुनौती दें: आप “स्मार्ट” या “मूर्ख” पैदा नहीं होते हैं, आप हमेशा विकसित हो सकते हैं।
  • प्रयास पर ध्यान दें, परिणामों पर नहीं: अपना सर्वश्रेष्ठ दें, न कि केवल अच्छे ग्रेड या जीत पर।
  • चुनौतियों को अवसर के रूप में देखें: गलतियों से सीखें और बढ़ते रहें।

याद रखें, स्विच मायने रखता है! विकास अनंत संभावनाओं के द्वार खोलता है।

The Truth About Ability and Accomplishment
(योग्यता और उपलब्धि के बारे में सच्चाई)

Fixed Vs Growth-Mindset Book Summary in Hindi
Fixed Vs Growth-Mindset Book Summary in Hindi

Mindset Book Summary In Hindi के इस चैप्टर में ऑथर कैरोल ड्वेक जन्मजात प्रतिभा के मिथक को तोड़ती हैं और विश्वास, प्रयास और उपलब्धि के बीच संबंध स्थापित करती हैं। वह फिक्स्ड और ग्रोथ माइंडसेट्स के बारे में हमें और गहराई से बताती हैं और यह भी बताती हैं की कैसे वे न केवल क्षमता की हमारी धारणा को प्रभावित करते हैं बल्कि यह भी दीसाइड करते हैं की हम कैसे आगे बढ़ते हैं और सफल होते हैं या असफ़ल।

सहज प्रतिभा के मिथक का खंडन

ऑथर असाधारण व्यक्तियों की पूर्वनिर्धारित प्रतिभा के बल पर जीवन में सहजता से आगे बढ़ने की रोमांटिक धारणा को ग़लत बताती हैं। वह इस धारणा को भी गलत बताती हैं की मोजार्ट और एडिसन जैसे लोग भी असाधारण प्रतिभा के धनी थे। वह कहती हैं की ये लोग जीवन में सफ़ल अपने अथक समर्पण, निरंतर अभ्यास और अटूट दृढ़ता की वजह से हुए, न की जन्मजात प्रतिभा की वजह से। वह यह भी कहती है की सफलता का श्रेय केवल जन्मजात प्रतिभा को देना सरासर ग़लत है और इससे, इन लोगों के अथक प्रयास और विकास की महत्वपूर्ण भूमिका के लिए बहुत कम जगह बचती है।

प्रशंसा की शक्ति और लेबल

चैप्टर में आगे ऑथर लोगों के belief और trajectories को आकर देने में प्रशंसा (Praise) और लेबल (Label) के प्रभाव के बारे में बात करती हैं। वह कहती हैं की हमें सिर्फ प्राकृतिक प्रतिभा की प्रशंसा चाहिए क्यूंकि इससे न सिर्फ फिक्स्ड माइंडसेट को बढ़ावा मिलता है बल्कि ये प्रयास के महत्व को भी कम करता है। इसके बजाय, वह प्रयास और सीखने की प्रक्रिया की प्रशंसा करने और विकास-उन्मुख परिप्रेक्ष्य (growth-oriented perspective) को बढ़ावा देने का सुझाव देती हैं। साथ ही साथ, वह “बेवकूफ” या “प्रतिभाहीन” जैसे नकारात्मक लेबल लगाने से बचने के लिए कहती हैं क्यूंकि ऐसे लेबल्स विकास में बाधा डाल सकते हैं और फिक्स्ड लिमिटेशन की भावना को मज़बूत कर सकते हैं।

सफलता को पुनर्परिभाषित करना: मान्यता से विकास तक

ये चैप्टर सफ़लता को लेकर हमारी पारम्परिक सोच को चुनौती देते हुए समाप्त होता है। ऑथर कहती हैं की फिक्स्ड माइंडसेट वाले लोग ख़ुद को सफल तभी मानते हैं जब उन्हें दुसरे लोग सफ़ल कहते हैं (external validation) और इसलिए वह लगातार अप्रूवल की तलाश में घुमते रहते हैं। इतना ही नहीं फिक्स्ड माइंडसेट वाले लोगों को विफलता (failure) से भी बड़ा डर लगता है जिसकी वजह से अनहैल्थी (unhealthy) कम्पटीशन और एंग्जायटी का जन्म होता है।

वहीँ दूसरी ओर, ग्रोथ माइंडसेट वाले लोग मानते हैं की सफ़लता निरंतर सीखने और आत्म-सुधार के कारण मिलती है। ऐसे लोग चुनातियों पर काबू पाते हैं, गलतियों को विकास की सीढ़ी के रूप में देखते हैं तथा नॉलेज और मास्टरी की खोज में ख़ुशी पाते हैं। यह माइंडसेट लोगों को पर्सनल ग्रोथ के लिए उनकी पूरी क्षमता का दोहन करने के लिए प्रेरित भी करता है।

Sports: The Mindset of A Champion

Fixed Vs Growth Athletes-Mindset Book Summary in Hindi
Fixed Vs Growth Athletes-Mindset Book Summary in Hindi

बुक एक चैप्टर 4 में ऑथर हमें बताती हैं की एथलीटस के बिलीफस का उनकी परफॉरमेंस पर क्या प्रभाव पड़ता है और वह 2 के माइंडसेट्स से हमारा परिचय कराती हैं।

फिक्स्ड माइंडसेट: या तो मैं अच्छा हूँ या नहीं

इस माइंडसेट वाले लोग सफलता को केवल जन्मजात प्रतिभा से जोड़कर देखते हैं और गलतियों को कमज़ोरियाँ उजागर करने वाला माना जाता है। जिसकी वजह से ये लोग चुनातियों से बचते हैं, असफलता से डरते हैं और दबाव में बिखर जाते हैं।

ग्रोथ माइंडसेट: मैं सीख कर बेहतर कर सकता हूँ

इसके विपरीत, ग्रोथ माइंडसेट वाले एथलीट सीखकर बेहतर बनने में विश्वास रखते हैं। ये लोग सफ़लता को प्रयास से प्रेरित मानते हैं और गलतियों को प्रगति की दिशा में मूल्यवान कदम मानते हैं। ग्रोथ माइंडसेट वाले एथलीट चुनातियों का डटकर सामना करते हैं, दृढ रहते हैं और निरंतर सुधार करने के लिए प्रयास करते रहते हैं।

“एफर्ट काउंट ट्वाइस” रूल

ऑथर कहती हैं की कड़ी मेहनत का मतलब सिर्फ कौशल हासिल करना नहीं है बल्कि जीत के लिए कड़ी मेहनत जीत के लिए भी आवश्यक है। विकास की मानसिकता वाले एथलीट चुनौतियों को व्यक्तिगत विकास के अवसर के रूप में देखते हैं।

फिक्स्ड बनाम ग्रोथ इन एक्शन

फिक्स्ड माइंडसेट: दिखावे की चिंता के साथ प्रतिभा को साबित करने और गलतियों से बचने पर ध्यान केंद्रित करती है। यह पूछा जाता है, “क्या मैं अच्छा लग रहा था?”
ग्रोथ माइंडसेट: सीखने और सुधार पर ध्यान केंद्रित करते हुए पूछते हैं, “मैं इससे क्या सीख सकता हूँ?”

कोचिंग और फीडबैक

फिक्स्ड माइंडसेट: फीडबैक को आलोचना के रूप में देखा जा सकता है, जो संभावित रूप से आत्मविश्वास को नुकसान पहुंचा सकता है।
ग्रोथ माइंडसेट: सीखने की प्रक्रिया को बढ़ाने, सुधार के साधन के रूप में फीडबैक का स्वागत करता है।

वास्तविक जीवन के चैंपियन

ऑथर वास्तविक जीवन के उदाहरण देती हैं, जिनमें माइकल जॉर्डन और सेरेना विलियम्स जैसे एथलीट शामिल हैं, जिन्होंने अपने संबंधित खेलों के शिखर पर पहुँचने के लिए विकास की मानसिकता को अपनाया।

Business: Mindset and Leadership

दोस्तों, Mindset Book Summary In Hindi के इस चैप्टर में ऑथर कहती हैं कि किसी भी कंपनी की सफ़लता सिर्फ इस बात पर निर्भर नहीं करती है के वो अपने कस्टमर्स के लिए कितना अच्छा प्रोडक्ट या सर्विस देते हैं बल्कि सफ़लता या असफ़लता का सबसे बड़ा कारण कंपनी की लीडरशिप होती है। कट थ्रोट कम्पटीशन के इस दौर में अच्छे लीडर्स अपनी कंपनी ग्रोथ माइंडसेट को बढ़ावा और प्राथमिकता देते हैं।

लीडर्स के लिए ग्रोथ एडवांटेज

ग्रोथ माइंडसेट अपनाने वाले लीडर्स की कुछ विशेषताएं जो ऑथर ने बताई हैं, वो इस प्रकार हैं-

चैलेंज चैंपियंस– ऐसे लीडर्स असफलताओं और बाधाओं से घबराते नहीं है बल्कि इन्हे सीखने और आगे बढ़ने के रूप में देखते हैं।
फ़ीडबैक– ऐसे लीडर्स फीडबैक को वैल्यू देते हैं और फीडबैक का सहारा अपनी स्ट्रेटेजी को बेहतर बनाने और ख़ुद को बदलती परिस्थितियों के अनुकूल ढालने के लिए करते हैं।
टीम बिल्डिंग– ये लीडर्स अपनी टीम को डेवेलप और empower करने पर ज़ोर देते हैं जिससे collaboration और shared success के कल्चर को बढ़ावा मिलता है।
सपोर्टस इनोवेशन– ऐसे लीडर्स एक ऐसा वातावरण बनाते हैं जो प्रयोग को बढ़ावा देता है, नए विचारों को अपनाता है और निरंतर सुधार की प्रक्रिया को बढ़ावा देता है।

ग्रोथ माइंडसेट लीडर्स

ऑथर कुछ ऐसे लीडर्स के उद्दाहरण देती हैं जिन्हे वो ग्रोथ माइंडसेट चैंपियन कहती हैं जैसे-

  • इंद्रा नूयी– पेप्सिको को बदलने में इंद्रा नूयी ने बहुत बड़ा योगदान दिया। उन्होंने एम्प्लोयी डेवलपमेंट और इनोवेशन के प्रति प्रतिबद्धता से पेप्सिको को विस्कस के रास्ते पर अग्रसर किया।
  • सत्या नडेला– सत्य नडेला ने माइक्रोसॉफ्ट में सहयोग, ओपन कम्युनिकेशन और ‘ग्रोथ हैकर’ कल्चर को बढ़ावा देकर उसे दोबारा जीवित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
  • मैरी बर्रा– इन्होने कस्टमर फोकस, टेक्नोलॉजिकल एडवांसमेंट के ज़रिये जनरल मोटर्स को क्राइसिस से बहार निकाला।

फिक्स्ड माइंडसेट का ट्रैप

वहीँ दूसरी ओर फिक्स्ड माइंडसेट वाले लीडर्स अपनी कंपनी की प्रगति में बाधा बन सकते हैं। ऐसे लीडर्स की कुछ क्वालिटीज़ जो ऑथर ने बताई हैं वो इस प्रकार हैं-

  • परिवर्तन का विरोध– ऐसे लीडर्स नयी परिस्थितियों के अनुकूल ढलने में ढुलमुल रवैया रखते हैं और फ़ीडबैक पर ध्यान नहीं देते जिससे की न सिर्फ अवसर मिस हो जाते हैं बल्कि stagnation भी आ जाता है।
  • सेल्फ-सेण्टरेड प्राथमिकताएँ– ऐसे लीडर्स के लिए उनकी पर्सनल इमेज और ईगो कंपनी की भलाई से अधिक महत्वपूर्ण होती हैं जिससे एक टॉक्सिक और अन प्रोडक्टिव वातावरण बनता है।
  • डर की संस्कृति– उनकी नेतृत्व शैली भय और धमकी के माहौल को बढ़ावा देती है, रचनात्मकता को दबाती है और सहयोग में बाधा डालती है।

फिक्स्ड माइंडसेट की गलतियाँ और उद्दाहरण

ऑथर हमारे सामने कुछ एक ऐसे उद्दाहरण पेश करती हैं जो फिक्स्ड माइंडसेट को दर्शाते हैं। आइये एक नज़र डालते हैं इन उद्दाहरणों पर-

  • नोकिया की गिरावट– कंपनी मोबाइल फ़ोन के बदलते बाजार के अनुकूल खुद को ढालने में असफल रही और अपनी पुराणी सफलताओं से ही चिपकी रही। इतना ही नहीं कंपनी ने कभी इनोवेशन का प्रयास नहीं किया और ग्रोथ मानसिकता का प्रदर्शन नहीं किया।
  • कोडक का पतन– एक समय फोटोग्राफी की दुनिया में कोडक एक बड़ा नाम हुआ करता था लेकिन कंपनी डिजिटल फोटोग्राफी के साथ तालमेल बिठाने में असमर्थ रही और उसने शार्ट टर्म प्रॉफ़िट्स को लॉन्ग टर्म विज़न के ऊपर प्राथमिकता दी जो अततः उसके पतन का कारण बना।
  • ब्लॉकबस्टर का डाउनफॉल– कंपनी स्ट्रीमिंग रेवोलुशन के आने के बाद भी अपने पुराने बिज़नेस मॉडल पर ही कायम रही जिससे वह आखिकार दिवालिया हो गई।

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